Holi Puja Timing 2026: जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और सही समय

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Latest Update: रंगों का त्योहार होली सिर्फ एक दिन का नहीं होता, बल्कि इसकी शुरुआत होती है होलिका दहन से एक रात पहले। बुराई पर अच्छाई की जीत का यह पर्व हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस त्योहार की सबसे अहम कड़ी है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त। अगर आप होली पूजा टाइमिंग 2026 की तलाश में हैं और जानना चाहते हैं कि होलिका दहन कितने बजे होगा, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। यहाँ हम आपको होलिका दहन 2026 डेट एंड टाइम इन हिंदी के साथ-साथ पूजा की सही विधि भी बताएँगे।

2026 में होलिका दहन कब है? (तिथि और समय)

हिंदू पंचांग के अनुसार, होली हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन रंगों वाली होली खेली जाती है, लेकिन उससे एक दिन पहले यानी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होलिका दहन किया जाता है।

2026 में यह तिथि 2 मार्च 2026, सोमवार को पड़ रही है। अगर आप सोच रहे हैं होलिका दहन कितने बजे होगा, तो यह समय पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ होने पर निर्भर करता है। परंपरा के अनुसार, होलिका दहन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में किया जाता है, जब पूर्णिमा तिथि लग रही हो।

होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurt)

शुभ मुहूर्त में ही होलिका दहन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साल 2026 के लिए होलिका दहन का सबसे उपयुक्त समय इस प्रकार है:

  • तिथि: 2 मार्च 2026, सोमवार
  • होलिका दहन का शुभ मुहूर्त: रात 08:54 PM से रात 11:08 PM तक
  • अवधि: 2 घंटे 14 मिनट

इस दौरान भद्रा का साया नहीं होता है, जिससे यह समय पूजा के लिए सबसे शुभ और उत्तम माना जाता है। इसी समय में पूरे विधि-विधान से होलिका की पूजा करके उसे अग्नि दी जाती है।

होलिका दहन की पूजा विधि (Holi 2026 Holika Dahan or Puja Vidhi)

होलिका दहन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। इसे करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि होली पूजा टाइमिंग 2026 का पूरा लाभ मिल सके।

  • सामग्री इकट्ठा करें: पूजा के लिए रोली, मौली (कलावा), अक्षत (चावल), फूल, गुड़, साबुत हल्दी, नारियल और बताशे जरूर रखें।
  • परिक्रमा: होलिका दहन से पहले और बाद में, अग्नि की 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करने की परंपरा है। परिक्रमा करते समय गेहूं की बालियाँ या साबुत अन्न अग्नि में डालें।
  • फसल की सुरक्षा: किसान भाई अपनी नई फसल (गेहूं और चने) की बालियों को होलिका की अग्नि में सेंकते हैं, जिसे ‘होलका’ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है इससे फसल अच्छी होती है और रोगों से बचाव होता है।
  • प्रार्थना: होलिका माता से परिवार की सुख-शांति और बुराइयों से रक्षा की प्रार्थना करें।

भद्रा का साया और होलिका दहन

होलिका दहन के मुहूर्त को लेकर अक्सर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति रहती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन के समय भद्रा का होना अशुभ माना जाता है। भद्रा एक ऐसा काल है जिसमें शुभ कार्य करना वर्जित होता है। अच्छी बात यह है कि 2026 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त भद्रा रहित है। इसलिए ऊपर बताया गया समय ही पूजा के लिए सबसे उचित रहेगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन भद्रा का समय सुबह में ही समाप्त हो जाएगा।

क्यों मनाई जाती है होली?

होली का त्योहार भक्त प्रह्लाद और उनकी बुआ होलिका की कहानी से जुड़ा है। हिरण्यकश्यप नामक राक्षस राजा ने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु भक्ति के कारण मारने का प्रयास किया। उसने अपनी बहन होलिका, जिसे वरदान था कि वह आग में नहीं जल सकती, को प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने को कहा। लेकिन वरदान का अभिमान और बुराई का साथ देने के कारण होलिका तो जल गई और प्रह्लाद बच गए। तब से यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

निष्कर्ष

तो अब आपको होलिका दहन 2026 डेट एंड टाइम इन हिंदी की पूरी जानकारी मिल गई है। 2 मार्च 2026 की शाम, रात 08:54 बजे से 11:08 बजे के बीच शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करके आप इस पर्व को सही तरीके से मना सकते हैं। अगले दिन 3 मार्च को रंगों वाली होली खेलकर इस उत्सव को पूरा करें। त्योहार की शुभकामनाएं! रंगों से भरी इस होली में आपका परिवार सुख-समृद्धि से भरा रहे।

नोट: यह समय सामान्य पंचांग गणना पर आधारित है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग या आधिकारिक स्रोतों से एक बार समय का मिलान जरूर कर लें।

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Subash

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